
इस बार गणतंत्र दिवस पर
भारतमाता कितना रोई होगी ।।
जय जवान जय किसान
एक को तलवार पकड़वा
दूसरे को बंदूकें थमाकर
आपस में लड़वाया होगा
दोनों बेटों का खून बहता देख
भारतमाता कितना रोई होगी ।
इस बार गणतंत्र दिवस पर
भारतमाता कितना रोई होगी ।।
दोनों के हाथों में थे तिरंगे
एक की परेड को सलामी
दूसरे की परेड को भटका
किसी बड़े ने उकसाया होगा
तिरंगे का अपमान होता देख
भारत माता कितना रोई होगी ।
इस बार गणतंत्र दिवस पर
भारतमाता कितना रोई होगी ।।
दोनों ही करते झंडे का सम्मान
एक को मिला पदकों का मान
दूसरे पर छोड़े आँसू गैस तमाम
डंडे मार मार जब भगाया होगा
देख भेद भाव को मन ही मन
भारत माता कितना रोई होगी ।
इस बार गणतंत्र दिवस पर
भारतमाता कितना रोई होगी ।।
जब पिता तुल्य नेताओं को
एक के घावों पर मरहम
दुसरे के जख्मों पर नमक
छिड़कते देख लिया होगा
उनके आँसू निकलते देख
भारत माता कितना रोई होगी ।
इस बार गणतंत्र दिवस पर
भारतमाता कितना रोई होगी ।।
देश के अन्नदाता है किसान
सबका एक ही धर्म किसानी
जब सबका होता एक अनाज
किसी भी धर्म का हो किसान
अन्न में साम्प्रदायिक घुन देख
भारत माता कितना रोई होगी ।
इस बार गणतंत्र दिवस पर
भारतमाता कितना रोई होगी ।।
*****जयहिंद *****
लेखिका- रचना गोयल