
सच की बोली बोल चिरइया
सच का दाना पानी ले।।
लेना है तो मिल कबीर से
और कबीर की बानी ले।।
ब्रज में राधा बन कर आई
बनी रसोई सीता की
युद्ध भूमि में तुम्हीं बनी थी
पहली पंक्ति गीता की।।
उड़ने की कला तुम्हारी
अब तो तेज रवानी ले।।
सच की बोली बोल चिरइया
सच का दाना पानी ले।।
आसामान में अगर उड़ोगी
ख़तरे वहां मिलेंगे ।
बाज पैतरे भर भर कर तुमको
रोज़ छलेंगे।।
अगर लड़ाई लड़नी है तो
मत पंखों में पानी ले।।
सच की बोली बोल चिरइया
सच का पानी ले।।
कई शिकारी जा कर तुमको
लेंगे रोज़ निशाने पर
और साँप भी चढ़ जाएंगे
जा जर ठिकाने पर।।
जंगल के अंधियारे से तू
उजली एक कहानी ले।।
सच की बोली बोल चिरइया
सच का दाना पानी ले।।
सच का दाना पानी ले।।
लेना है तो मिल कबीर से
और कबीर की बानी ले।।
ब्रज में राधा बन कर आई
बनी रसोई सीता की
युद्ध भूमि में तुम्हीं बनी थी
पहली पंक्ति गीता की।।
उड़ने की कला तुम्हारी
अब तो तेज रवानी ले।।
सच की बोली बोल चिरइया
सच का दाना पानी ले।।
आसामान में अगर उड़ोगी
ख़तरे वहां मिलेंगे ।
बाज पैतरे भर भर कर तुमको
रोज़ छलेंगे।।
अगर लड़ाई लड़नी है तो
मत पंखों में पानी ले।।
सच की बोली बोल चिरइया
सच का पानी ले।।
कई शिकारी जा कर तुमको
लेंगे रोज़ निशाने पर
और साँप भी चढ़ जाएंगे
जा जर ठिकाने पर।।
जंगल के अंधियारे से तू
उजली एक कहानी ले।।
सच की बोली बोल चिरइया
सच का दाना पानी ले।।
-शैलजा सिंह
दिल्ली
दिल्ली